म्यूच्यूअल फंड एस. आई. पी. चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

म्यूच्यूअल फंड एस. आई. पी.एक काफी हैरान कर देने वाला निवेश का विकल्प है क्योंकि लंबे समय के निवेश में इसने बेहतरीन रिटर्न प्रदान किये हैं। नए निवेशक इसकी तरफ आकर्षित तो हो रहे हैं परन्तु वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि कौनसी म्यूच्यूअल फंड एस. आई. पी. स्कीम उनके लिए बेहतर रहेगी। ऐसा नहीं है कि पुराने निवेशकों को पता है की सही म्यूच्यूअल फंड एस. आई. पी. स्कीम कौनसी है क्योंकि हर बार स्कीम का चुनाव करते समय उन्हें भी यही दुविधा रहती है। तो आईये जानते हैं इस लेख के जरिये की एस. आई. पी.होती क्या है और उसे चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें ?

एस. आई. पी. का अर्थ – एस. आई. पी. का अर्थ है हर महीने नियमित अंतराल पर नियमित निवेश करना किसी भी म्यूच्यूअल फंड स्कीम में। यह एक बहुत ही लचीला निवेश होता है जो आपको लम्बी अवधि में संपत्ति बनाने में तो मदद करता है, साथ ही हमेशा ज़रूरत के समय उपलब्ध भी रहता है। एस. आई. पी. के जरिये निवेश का सबसे बड़ा फायदा है चक्रवृद्धि ब्याज के जैसा रिटर्न मिलना। इसी के कारण लंबे समय में हर महीने की जमा की गयी रकम दोगुना / तिगुना हो जाती है।

कैसे चुने सही म्यूच्यूअल फंड एस. आई. पी.स्कीम ?

सही स्कीम के चुनाव पर ही निर्भर करता है कि हमें कैसा रिटर्न प्राप्त होगा। एस. आई. पी. के लिए स्कीम चुनते समय इन बिंदुओं पर खास ध्यान दें –

1. निवेश का लक्ष्य – निवेश शुरू करने से पहले एक बात जान लें कि निवेश किस लक्ष्य के लिए कर रहे हैं। क्या निवेश लम्बी अवधि के लिए है या छोटी अवधि के लिए। आप कितना जोखिम उठा सकते हैं क्या इसकी जानकारी है आपको ? इन दोनों सवालों के उत्तर पर निर्भर करता है कि आपको कौनसी स्कीम सूट करेगी। उदाहरण के तौर पर अगर आप ऐसे निवेशक है जो कम जोखिम लेना चाहते हैं तो आपको डेट स्कीम सूट करेगी और अगर आप जोखिम उठा सकते हैं तो आपके लिए इक्विटी फंड या बैलेंस्ड फंड में एस. आई. पी. अच्छी रहेगी।

2. फंड का प्रकार – म्यूच्यूअल फंड कई प्रकार के होते हैं जैसे कि इक्विटी फंड, डेट फंड, बैलेंस्ड फंड, आदि, ऐसे ही म्यूच्यूअल फंड में ओपन एंडेड एवं क्लोज एंडेड फंड भी आते हैं। एक निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता और लक्ष्य की समय सीमा पर निर्भर करता है कि वह कौनसे फंड में निवेश करे।

3. पिछले वर्षो का प्रदर्शन / रिटर्न – निवेश करने से पहले ध्यान से स्कीम के बारे में पढ़ें। पिछले 3/5/10 साल का प्रदर्शन देखें और उसकी अन्य प्रतिद्वंदी स्कीम के साथ तुलना करें। पिछला प्रदर्शन आपको बताएगा की फंड ने मार्किट में कैसा रिटर्न दिया है और क्या यह फंड अपने प्रतिद्वंदी के सामने लम्बी अवधि में टिक पायेगा। ऐसे फंड को न चुने जो अच्छे मार्किट की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा हो। इक्विटी फंड की तुलना करते समय छोटी अवधि को न देखें।

4. म्यूच्यूअल फंड की कंपनी – एक स्कीम उतनी ही अच्छी होती है जितनी उसको सँभालने वाली कंपनी। कंपनी के फैसले ही स्कीम को बनाते और बिगड़ते हैं। अगर कंपनी सही निर्णय नहीं लेगी तो निवेशकों का पैसा डूबना तय होता है। इसीलिए निवेश करने से पहले स्कीम और कंपनी दोनों के बारे में जानकारी निकालने के बाद ही निर्णय लें।

5. एक्सपेंस रेश्यो – एक्सपेंस रेश्यो दर्शाता है कि स्कीम कितना खर्चा करती है। अगर कोई स्कीम 2.5% का खर्च दिखाती है तो मतलब वह महंगी है । इस खर्चे में फंड मैनेजमेंट फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव फीस, आदि जुडी रहती हैं। जितनी बड़ी स्कीम होगी उतना ही एक्सपेंस रेश्यो यानी खर्चा कम होता है। अगर कोई 2 कंपनी की एक जैसी थीम वाली स्कीम में से एक 1% और दूसरी 2% का खर्च दिखाती है तो आप 1% वाली का चुनाव कर सकते हैं।

6. एंट्री एवं एग्जिट लोड – कुछ साल पहले तक निवेश करते समय एक लोड लगता था जिसे एंट्री लोड कहते थे। एंट्री लोड अब बंद हो चूका है परन्तु एग्जिट लोड अभी भी चालू है। यह उन निवेशकों पर लगता है जो एक तय समय से पहले स्कीम में से पैसा वापस निकाल लेते हैं। हर स्कीम का अपना एग्जिट लोड और समय सीमा होती है। तो निवेशकों को चाहिए की वे निवेश को ऐसे प्लान करें की पैसा निकालते समय एग्जिट लोड न लगे।

अगर एक निवेशक ऊपर दिए गए बिंदुओं के हिसाब से स्कीम का चुनाव करेगा तो उसका लक्ष्य जल्द प्राप्त होगा और नुकसान की सम्भावनाये कम हो जाएँगी ।

लेखक –
आयुष भार्गव
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर

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