कब बाहर निकले इक्विटी में निवेश से ?

जब भी बाजार ऊपर या नीचे जाता है तब निवेशक हमसे कुछ सवाल जरूर पूछते हैं जैसे की क्या हम इक्विटी निवश से प्रॉफिट बुक कर लें या फिर हम अभी बेच कर बाद में फिर खरीद ले ताकि गिरते मार्किट में ज्यादा नुक्सान न हो। निवेशकों के इन सवालो के पीछे छिपा होता है असली सवाल और वो है कि इक्विटी निवेश से बाहर निकलने के सही समय का पता कैसे लगाए ?
सभी प्रश्नो का जवाब सभी निवेशकों के लिए एक जैसा नहीं हो सकता है क्योंकि हर निवेशक का निवेश के पीछे का उद्देश्य अलग होता है, समय सीमा अलग होती है, तो जाहिर सी बात है कि बेचने के पीछे का कारण भी अलग ही होगा। तो आइये देखते हैं कि निवेशक किन परिस्थितियों में अपना इक्विटी निवेश बेच सकते हैं –

१. जब लक्ष्य नजदीक हो –

अगर आप जिस लक्ष्य के लिए निवेश कर रहे हैं जैसे कि बच्चों कि पढाई या घर खरीदने के लिए और यही लक्ष्य कि तारीख नजदीक हो जैसे कि १ या २ साल तब आप इक्विटी निवेश से बाहर निकल कर किसी सुरक्षित विकल्प में अपने निवेश को रख सकते हैं। क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया और इक्विटी बाजार गिर गया तो आपके निवेश कि कीमत भी कम हो जाएगी जिसके कारण आपको या तो लक्ष्य कि तारीख को आगे बढ़ाना पड़ेगा नहीं तो लक्ष्य को पूरा करने के लिए कहीं और से रकम जुटाना पड़ सकता है।

२. पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने के लिए –

जब भी हम निवेश करते हैं हमे पता होना चाहिए कि हमे कितना इक्विटी में निवेश करना है और कितना डेट में। यह सब तय होता है हमारी जोखिम लेने कि क्षमता पर। अगर हम 80:20 के तय रेश्यो से निवेश कि शुरुवात करते हैं तो हमे यह रेश्यो को बनाकर चलना होगा। आइये उदहारण से जानते हैं – मान लीजिये आपने कुल रु 1 लाख का निवेश 80:20 के रेश्यो से किया तो इस हिसाब से रु 80,000 इक्विटी में जायेंगे और रु 20,000 डेट में जायेंगे। 1 साल बाद मान लीजिये शेयर बाजार अच्छा रिटर्न देता है और आपके रु 80,000 कि कीमत रु 95,000 हो जाती है और डेब्ट कि कीमत रु 21,000 हो जाती है तो इस हिसाब से निवेश में इक्विटी और डेट का रेश्यो होगा 82:18। अब आपकी जोखिम लेने कि क्षमता के अनुसार हमे 80:20 का रेश्यो बना कर चलना है तो उसके लिए इक्विटी निवेश में से थोड़ा बेच कर डेट में निवेश करना पड़ेगा। ऐसे समय में अगर आप इक्विटी को बेचेंगे तो वो सही रहेगा।

३. जब शेयर या म्यूच्यूअल फंड्स स्कीम ख़राब प्रदर्शन करे –

अपने निवेश को घाटे में कोई नहीं बेचना चाहता है परन्तु अगर शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम परफॉर्म ही न करे 6-8 महीने तक और आपके निवेश कि कीमत सिर्फ नीचे ही जा रही हो तो ऐसे समय नुक्सान उठा कर निवेश से बहार निकलने में ही भलाई होती है। बाजार में उसके कई विकल्प मौजूद होते हैं जो आगे फायदा दे सकते हैं।

४. कम समय में अच्छा रिटर्न –

ऐसा बहुत कम बार या मुश्किल से ही होता है एक निवेशक कि ज़िन्दगी में जब उसे इक्विटी निवेश में कम समय में अच्छा रिटर्न मिल जाए। अगर ऐसा होता भी है तो मुनाफा कमा कर बाहर निकलने में ही भलाई होती है। ऐसे समय में इक्विटी को बेचना ही बेहतर होता है।

इक्विटी निवेश से कमाने का एक ही नुस्खा है कि निवेशक अच्छे और क्वालिटी स्टॉक या स्कीम को चुने और उसमे लम्बी अवधि के लिए थोड़ा थोड़ा करके निवेश करें। छोटी अवधि में बाजार आपको डरा ज़रूर सकता है परन्तु अगर निवेशक लम्बी अवधि का है तो उसमे बने रहने में ही भलाई होगी जिससे निवेशक को अच्छा रिटर्न भी मिलेगा और लक्ष्य भी पूरा हो जायेगा ।

लेखक –
आयुष भार्गव
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर

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