आईये जाने एन.पी.एस. – नेशनल पेंशन स्कीम के बारे में

भारत में कई पेंशन स्कीम उपलब्ध है जो की रिटायरमेंट के बाद रेगुलर पेंशन प्रदान करती है । नेशनल पेंशन स्कीम (एन.पी.एस.) भारत सरकार की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है जिसके अंतर्गत कोई भी भारतीय नागरिक (18-65 तक की उम्र वाले) या एन.आर.आई. अपना खाता खोल कर उसमे निवेश कर सकता है।


भारत में एन.पी.एस. को सन 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए लागु किया गया था।  इस स्कीम को पुरानी स्कीम की जगह लाया गया था।  पुरानी स्कीम के तहत पेंशन नौकरी के आखरी 10 महीने की बेसिक सैलरी और भत्ते के ऊपर निर्भर करती थी। नयी स्कीम के तहत जो रकम कर्मचारी निवेश करता है सरकार भी उतनी रकम निवेश करती है और फिर कुल राशि को फण्ड मैनेजर नियमानुसार निवेश करते हैं। रिटायरमेंट के बाद स्कीम में जो भी मूल्य होता है उसमे से कुछ भाग पेंशन के रूप में हर महीने मिलता है और कुछ एक मुश्त रूप में मिल जाता है।

सन 2009 में इस स्कीम को सभी के लिए खोल दिया गया था। भले ही वह प्राइवेट कर्मचारी हो या व्यापारी सभी लोगो के लिए  एन.पी.एस. निवेश का एक विकल्प बन गया था। शुरुआत के दिनों में लोग इसमें निवेश करने से कतराते थे क्योंकि एक तो इसमें निवेश करने पर कोई टैक्स में छूट भी नहीं थी और दूसरा यह की परिपक्वता पर भी जो एक मुश्त राशि मिलती थी उस पर भी टैक्स लगता था। सन 2011 के बाद जब सरकार ने इसे टैक्स छूट में शामिल कर लिया उसके बाद इस स्कीम की लोकप्रियता बढ़ गयी।

सन 2015 के बाद इस स्कीम को कई प्राइवेट कंपनियों ने भी अनिवार्य कर दिया और सरकार ने भी इस स्कीम में दो तरह की टैक्स छूट देना शुरू कर दिया – एक सेक्शन 80 (सी) के तहत रु 1.50 लाख तक और दूसरी सेक्शन 80 सी.सी.डी. (1बी) के तहत रु 50 हज़ार अतिरिक्त।  इस लेख में हम आगे टैक्स छूट को विस्तार से समझायेंगे।

कैसे काम करती है एन.पी.एस. स्कीम ?


इस स्कीम के तहत दो प्रकार के खाते होते हैं – टीअर – 1 एवम टीअर – 2

टीअर -1 खाता खोलना सबके लिए आवश्यक होता है और टीअर 2 खाता ऐच्छिक होता है। आइये दोनों खातों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

टीअर – 1 खाता – टीअर -1 खाता सभी निवेशकों के लिए आवश्यक होता है। इसमें निवेशक रु 500 से शुरुआत कर सकता है।  सालाना इसमें कम से कम रु 1000 डालना अनिवार्य है।  निवेशक चाहे तो मासिक रूप से  या फिर एक मुश्त भी जमा करवा सकते हैं।  इस खाते के अंतर्गत जमा की गयी राशि रिटायरमेंट (60 की उम्र) तक के लिए लॉक हो जाती है।  सिर्फ कुछ ही मौको के लिए ही निकासी की जा सकती है।  इस खाते को खोलते ही एक परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर जारी हो जाता है जो एक पहचान नंबर का काम करता है निवेशक के लिए।

टीअर -2 खाता – टीअर -2 खाता निवेशकों के लिए खोलना ज़रूरी नहीं होता।  इस खाते के अंतर्गत निवेशक कभी भी राशि डाल सकता है और निकाल भी सकता है।  इस खाते में सरकार या अन्य नियोक्ता निवेश नहीं करते हैं। यह खाता निवेशक तभी खोल सकता है जब उसका टीअर -1 खाता खुला हो। यह खाता बिलकुल टीअर -1 खाते जैसा ही काम करता है। इसके अंतर्गत कोई भी राशि डालना अनिवार्य नहीं है।  निवेशक टीअर -2 से कभी भी टीअर -1 खाते में राशि ट्रांसफर कर सकता है  परन्तु टीअर -1 से टीअर – 2 में नहीं।


टीअर – 1 एवम टीअर – 2 खाते में समानताएं –

1. दोनों खातों के अंतर्गत निवेश के विकल्प समान होते हैं।
2. दोनों खातों के अंतर्गत खर्चे भी समान होते हैं।  जैसे की फण्ड मैनेजर चार्ज – ०.०१% एवम कस्टोडियन चार्ज – ०.००३२%

टीअर – 1 एवम टीअर – 2 खाते में असमानताएं –

1. टीअर – 1 खाता अनिवार्य है। टीअर – 2 खाता नहीं।
2. टीअर – 1 खाते में सालाना कम से कम रु 1000 निवेश करना जरुरी है।  टीअर – 2 खाते में ऐसा कुछ भी ज़रूरी नहीं है।
3. टीअर – 1 खाते में निवेश अनिवार्य रूप से 60 की उम्र तक चालू रखना पड़ता है।  और कुछ निकासी भी नहीं कर सकते। टीअर – 2 खाते में ऐसा कुछ भी ज़रूरी नहीं है।
4. टीअर – 1 खाते के अंतर्गत निवेश की गयी राशि पर टैक्स में छूट मिलती है।  टीअर – 2 में नहीं।


एन.पी.एस. में कौन कौन से निवेश के विकल्प उपलब्ध हैं ?
दोनों तरह के खातों में सरकार ने निवेशकों के लिए 4 तरीके के विकल्प उपलब्ध करवाए हैं

1. इक्विटी (इ) – इसके तहत राशि शेयर बाजार में निवेश की जाती है।
2. कॉर्पोरेट डेट (सी) – यह स्कीम में सरकारी कंपनी द्वारा, पब्लिक फाइनेंशियल इस्टीट्यूट द्वारा, या इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी द्वारा जारी किये गए बांड्स में या मनी मैनेजर फण्ड में निवेश किया जाता है।
3. गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (जी) – इसके तहत केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा जारी किये गए निवेश की प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है।
4. अलटरनेट इन्वेस्टमेंट फण्ड – इसके तहत आर.इ.आई.टी., पेंटिंग्स व् अन्य अलटरनेट विकल्पों में निवेश किया जाता है।

किस विकल्प में कितना निवेश करे ?

खाता खोलते समय निवेशक को दो विकल्प दिए जाते हैं।  पहला ऑटो विकल्प और दूसरा एक्टिव विकल्प

1. ऑटो विकल्प – ऑटो विकल्प के अंतर्गत निवेश के विकल्पों को जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर तीन अलग विकल्पों में बांटा गया है

अ) एग्रेसिव लाइफ साइकिल फण्ड – यह विकल्प उनके लिए है जिन्हे इक्विटी में ज्यादा निवेश करना है। इसमें 35 तक की उम्र वालो को 75% तक इक्विटी में नवीश करने का मौका मिलता है जो 55 की उम्र तक घट कर सिर्फ 15% रह जाता है
ब) मॉडरेट लाइफ साइकिल फण्ड – यह उनके लिए है जिन्हे इक्विटी में न तो कम और न ही ज्यादा निवेश करना होता है। इसमें 35 की उम्र तक 50% तक इक्विटी में निवेश होता है जो 55 की उम्र तक घट कर  सिर्फ 10% तक रह जाता है।
  स) कंज़र्वेटिवे लाइफ साइकिल फण्ड – यह उनके लिए है जिन्हे इक्विटी में निवेश बहुत कम करना होता है।  इसके अंतर्गत 35 की उम्र तक 25% इक्विटी में निवेश होता है जो 55 की उम्र तक घट कर सिर्फ 5% रह जाता है।

इन तीनो विकल्पों के अंतर्गत रीबैलेंसिंग निवेशक की जन्म तारीख पर अपने आप हो जाती है।

2. एक्टिव विकल्प – इसके अंतर्गत निवेशक निवेश के चार विकल्पों में से किसमे कितना निवेश करना है स्वयं चुन सकता है।  इसमें 75% इक्विटी में सर्वाधिक होता है जो 50 की उम्र के बाद हर वर्ष 2.5% कम होता है जब तक वह 50% तक न पहुँच जाये। एक वित्तीय वर्ष में निवेशक एक बार एक्टिव से ऑटो या ऑटो से एक्टिव विकल्प में आ जा सकता है।


कौन सा विकल्प चुने ?
अगर आपको पता है की आपके लिए सही एसेट एलोकेशन क्या है और आपको सभी निवेश के विकल्पों के बारे में जानकारी है तो आप एक्टिव चॉइस को चुने। अगर आपको ज्यादा जानकारी नहीं है तो आप ऑटो चॉइस को चुन सकते हैं।   


इन फंड्स को कौन संचालित करता है ?

पेंशन फण्ड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पी.ऍफ़.आर.डी.ए.) ने 7 अलग अलग मैनेजर को चिन्हित किया है जो फण्ड को संचालित करते है। उनके नाम हैं –

1. एच.डी.ऍफ़.सी. पेंशन फण्ड
2. एस.बी.आई. पेंशन फण्ड
3. यू.टी.आई. रिटायरमेंट सोल्यूशंस
4. आई.सी.आई.सी.आई. प्रुडेंशियल पेंशन फण्ड
5. एल.आई.सी. पेंशन फण्ड
6. कोटक महिंद्रा पेंशन फण्ड
7. आदित्य बिरला सनलाइफ पेंशन फण्ड

इनमे से निवेशक टीअर -1 एवम टीअर -2 के तहत एक ही या अलग अलग फण्ड मैनेजर को चुन सकते हैं अगर वह किसी को नहीं चुनता तो स्कीम में एस. बी. आई. पेंशन फण्ड मैनेजर को अपने आप ही चुन लिया जाता है।  फण्ड मैनेजर को आप साल में कभी भी बदल भी सकते हैं।


एन.पी.एस. में निकासी के नियम –
जैसा की लेख में पहले बताया है की एन.पी.एस. के टीअर -2 खाते में कभी भी निकासी कर सकते हैं लेकिन उसके उलट टीअर -1 खाते में निकासी के कुछ नियम हैं –

1. इस खाते मैं पूर्ण निकासी 60 की उम्र पर ही होती है।
2. अगर किसी के खाते में रु 1 लाख से कम हैं तो वह पूरी राशि 60 की उम्र से पहले निकाल सकता है।
3. 60 की उम्र के बाद भी अगर खाते में राशि रु 2 लाख से कम है तो पूरी राशि मिल जाएगी, और अगर रु 2 लाख से ज्यादा है तो खाते में कुल राशि का 60% हिस्सा एक मुश्त मिल जायेगा और बाकी की राशि की पेंशन बना डी जाएगी जो निवेशक को मासिक रूप से मिलेगी।
4. एक निवेशक 60 की उम्र तक सिर्फ तीन बार ही आंशिक निकासी प्राप्त कर सकता है।
5. आंशिक निकासी की राशि खाते में कुल जमा राशि की 25% से ज्यादा नहीं हो सकती है।
6. आंशिक निकासी की सुविधा सिर्फ कुछ ही मौको पर संभव है जैसे की बच्चो की पढाई, बच्चो की शादी, गंभीर बीमारी के इलाज में या फिर घर बनवाने या खरीदने की स्थिति में।


एन.पी.एस. खाते में टैक्स सम्बंधित छूट –

एन.पी.एस. के अंतर्गत निवेशक 2 बार टैक्स में छूट प्राप्त कर सकते हैं – एक निवेश करते समय और दूसरा निकासी के समय। आइये इसके बारे में और विस्तार से जानते हैं –

1. निवेश करते समय –

एक निवेशक एन.पी.एस.खाते में सेक्शन 80 सी सी डी (1) के अंतर्गत खुद के निवेश पर छूट प्राप्त कर सकता है।  यह सेक्शन 80(सी) की रु 1.50 लाख की सीमा के अंतर्गत ही आता है। एक कर्मचारी अपनी कुल आय का 10% तक की राशि पर छूट प्राप्त कर सकता है, यह राशि ज्यादा से ज्यादा रु 1.5  लाख तक हो सकती है।  प्रोफेशनल या व्यापारी वर्ग के लिए यह कुल आय का 20% हो सकता है और राशि रु 1.5 लाख तक ही हो सकती है।
इसके अलावा सेक्शन 80 सी सी सी डी (2) के तहत एक कर्मचारी अपने नियोक्ता के योगदान पर भी छूट प्राप्त कर सकता है। इसके लिए नीचे दिए गए तीन बिंदुओं में से सबसे कम राशि पर छूट मिल सकती है।

1. नियोक्ता द्वारा योगदान की राशि।
2. बेसिक आय + भत्ता का १०% हिस्सा
3. कर्मचारी की आय

यह राशि सेक्शन 80 सी के तहत योगदान से बाहर होती है। इस सेक्शन के अंतर्गत प्रोफेशनल व्यक्ति या व्यापारी छूट नहीं ले सकते।

इन दोनों सेक्शन के अलावा कोई भी व्यक्ति सेक्शन 80 सी सी सी डी (1बी) के तहत रु 50,000 की अतिरिक्त निवेश की राशि पर भी छूट प्राप्त कर सकता है। इस तरह निवेशक सालाना रु 2 लाख तक के निवेश पर छूट प्राप्त कर सकता है।  यह छूट एन. पी. एस. के टीअर -1 खाते में निवेश की गयी राशि पर ही लागू होगी।

2. निकासी के समय टैक्स में छूट –

60 की उम्र पर निकासी के समय कुल जमा राशि का 60% हिस्सा टैक्स फ्री होता है। बाकी की राशि को एन्युटी प्लान के तहत निवेशक को पेंशन के रूप में दिया जाता है। यह राशि टैक्स छूट से बाहर होती है। 

एन. पी. एस. खाता कैसे खोल सकते हैं ?


एन. पी. एस. खाता बैंक में या फिर अधिकृत फाइनेंस ऑफिस में ही खोल सकते हैं।  अधिकृत ऑफिस की लिस्ट एन. पी. एस.की वेबसाइट पर उपलब्ध है। अगर निवेशक ऑनलाइन खाता खोलना चाहता है तो वह यह भी कर सकता है।  ख़ास बात यह है की खाता कहीं पर भी खोलकर कहीं से भी ऑपरेट किया जा सकता है। खाता खोलते समय आप किन्ही 3 व्यक्तियों को नॉमिनी बना सकते हैं। ऑफलाइन खाता खोलने में खर्च ज्यादा आता है और हर बार निवेश करने पर भी बैंक को या अधिकृत ऑफिस में चार्ज देना पड़ता ह।  इसके उलट ऑनलाइन खाता खोलने में कोई चार्ज नहीं लगता है और निवेश करने पर भी कोई चार्ज नहीं लगता है।  


नेशनल पेंशन स्कीम में निवेश के फायदे –

एन. पी. एस.खाता एक लम्बी अवधि की निवेश योजना है। इसमें निवेशक अनुशासित तरीके से निवेश करके अपने रिटायरमेंट को प्लान कर सकता है।  लम्बी अवधि में इक्विटी में निवेश करने से ज्यादा रिटर्न मिलता है और साथ ही एसेट एलोकेशन से निवेश को मजबूती भी मिलती है।  दुसरे निवेश के विकल्पों को देखा जाये तो एन. पी. एस.में खर्च काफी कम है। एक यूलिप प्लान में लम्बी अवधि में 1.5% से 2% तक का सालाना खर्च होता है वहीँ म्यूच्यूअल फण्ड में 0.5 % से 1.5% तक का सालाना खर्च होता है। वहीँ एन. पी. एस. में खर्च सिर्फ 0.25% का ही आता है। हाँ तरलता के मामले में म्यूच्यूअल फण्ड आगे निकल जाता है पर अगर निवेशक लम्बी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं तो एन. पी. एस. का लॉक इन पीरियड सही लगता है। और अगर निवेश के साथ टैक्स में छूट भी मिल जाये तो वह दोगुना फायदा देता है।

क्या एन. पी. एस. में निवेश करना चाहिए ?

हाँ, एन. पी. एस. में हर उस व्यक्ति को निवेश करना चाहिए जो रिटायरमेंट की प्लानिंग कर रहा हो। (वह एन. पी. एस. खाता खोलने में, पोर्टफोलियो चुनने में रिटायरमेंट एडवाइजर की मदद ले सकता है) चाहे वह कर्मचारी हो या प्रोफेशनल दोनों अपनी पेंशन की प्लानिंग इस एन. पी. एस. खाते के जरिये कर सकते है। तो आज ही अपनी निवेश की पोर्टफोलियो में एन. पी. एस. को शामिल करे और अपना रिटायरमेंट प्लान करे।

लेखक – आयुष भार्गव
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर

इमेज सोर्स – एन पी एस की अधिकृत वेबसाइट

One thought on “आईये जाने एन.पी.एस. – नेशनल पेंशन स्कीम के बारे में

  • 18 August 2020 at 3:55 pm
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    It was wonderfull information which will help us for further plan.

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